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जीवनदायिनी मान नदी पर जलकुंभी का कब्जा, दूषित हो रहा पानी

पेयजल संकट की आशंका; आंदोलन की चेतावनी



रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597



मनावर (धार)। नगर की जीवनदायिनी मान नदी इन दिनों जलकुंभी के बढ़ते प्रकोप से जूझ रही है। वार्ड क्रमांक 9 क्षेत्र में स्थित नदी का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से पूरी तरह ढक चुका है। मान नदी पुल से लेकर मानता गणेश मंदिर तक फैली जलकुंभी ने नदी को हरी चादर की तरह ढक दिया है। इससे नदी का पानी दूषित होता जा रहा है और उसका प्राकृतिक प्रवाह भी बाधित हो रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी सफाई अभियान नहीं चलाया गया तो मान नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। यही नदी नगर के जल स्रोतों का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए भविष्य में पेयजल संकट भी गहरा सकता है।

*नगर पालिका वार्ड पार्षद जिमी सावनेर* ने नगर पालिका प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाने के कारण आज यह स्थिति बनी है। कई बार ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जनसहयोग से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।

*नगर पालिका निर्माण समिति के सभापति कैलाश राठौड़* ने कहा कि मान नदी में जलकुंभी का फैलाव गंभीर चिंता का विषय है। नदी को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए नगर पालिका व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाएगी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

*क्या है जलकुंभी?*

जलकुंभी एक अत्यंत तेजी से फैलने वाला जलीय खरपतवार है। यह उन नदियों और जलाशयों में तेजी से बढ़ती है जहाँ गंदा पानी, सीवेज, रासायनिक उर्वरकों का बहाव तथा पानी का ठहराव अधिक होता है। अनुकूल परिस्थितियों में यह कुछ ही दिनों में पूरे जल क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेती है।

*जलकुंभी फैलने के प्रमुख कारण*

नालों का गंदा पानी सीधे नदी में मिलना।
घरेलू सीवेज एवं ठोस कचरे का नदी में प्रवाह।
कृषि क्षेत्रों से रासायनिक उर्वरकों का बहकर आना।
नदी के जल का ठहराव और नियमित सफाई का अभाव।
समय पर नियंत्रण एवं निगरानी नहीं होना।
*दुष्प्रभाव…*

पानी की गुणवत्ता तेजी से खराब होती है।
पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटने से मछलियां एवं अन्य जलीय जीव मरने लगते हैं।
नदी का प्राकृतिक प्रवाह रुक जाता है।
मच्छरों एवं रोग फैलाने वाले कीटों का प्रकोप बढ़ता है।
दुर्गंध फैलने से आसपास का वातावरण प्रदूषित होता है।
लंबे समय तक यही स्थिति रही तो नदी दलदल में बदल सकती है और उसका अस्तित्व समाप्त होने का खतरा बढ़ जाएगा।

*क्या है समाधान?*

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विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक बार जलकुंभी हटाना पर्याप्त नहीं होगा। नियमित सफाई अभियान, मशीनों से जलकुंभी निष्कासन, नदी में गिरने वाले नालों का उपचार, सीवेज के सीधे प्रवाह पर रोक, जन जागरूकता तथा निरंतर निगरानी ही इस समस्या का स्थाई समाधान है।

*जनभावना*

नगरवासियों का कहना है कि मान नदी मनावर की पहचान और जीवनरेखा है। यदि आज इसे बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ नदी और सुरक्षित पेयजल से वंचित हो सकती हैं। अब समय आ गया है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और नागरिक मिलकर मान नदी के संरक्षण का संकल्प लें।

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